Lok Chand Gupta
Published: Jul 31 | Updated: Aug 11

  • ‘नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (निसार) उपग्रह को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 30 जुलाई, 2025 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया ।
  • जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित इस उपग्रह को 745 किलोमीटर की ऊँचाई पर सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया है।
  • इसरो और नासा ने संयुक्त रूप से विकसित ‘निसार’ (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar-NISAR) अपनी तरह का पहला मिशन है।
  • यह पृथ्वी का निरीक्षण करने वाला पहला उपग्रह है, जो दोहरे आवृत्ति वाले सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर)- नासा के एल-बैंड और इसरो के एस-बैंड – के साथ पृथ्वी का निरीक्षण करेगा।

निसार की विशेषताएँ

  • उपग्रह का वजन : 2,392 किलोग्राम
  • आॅर्बिट : सूर्य-समकालिक कक्षा (98.40 डिग्री झुकाव)
  • मिशन अवधि: 3 साल, लेकिन ईंधन और स्थिरता के आधार पर 5 साल तक चल सकता है।
  • एंटीना: नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी द्वारा विकसित 12 मीटर तारों का मेश एंटीना (अब तक का सबसे बड़ा एंटीना)
  • तस्वीर : हर 12 दिन में धरती की 242 किलोमीटर चौड़ी पट्टी की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेगा। इसके लिए पहली बार आधुनिक SweepSAR तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
  • किसी भी मौसम और रोशनी की स्थिति में दिन-रात धरती की सतह की निगरानी करने में सक्षम
  • लाभ : यह सैटेलाइट भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पहले से चेतावनी देगा, फसलों की स्थिति, जंगलों की बायोमास और वनों की कटाई को मॉनिटर करेगा (पृथ्वी का एमआरआई स्कैनर)।
    • भूकंप से पहले फॉल्ट लाइनों (धरती की दरारें) में होने वाली हलचल को यह पकड़ लेगा ।