बुद्ध के पवित्र पिपराहवा अवशेषों के कुछ आभूषण, जो हाल ही में हांगकांग के सोथबी में नीलामी के लिए रखे गए थे, 30 जुलाई, 2025 को भारत को वापस लौटा दिए गए हैं।
इन्हें औपनिवेशिक शासन के दौरान 127 वर्ष पहले ले जाया गया था।
पिपरहवा निशानियों की खोज 1898 में की गई थी, किंतु औपनिवेशिक काल के दौरान इन्हें भारत से बाहर ले जाया गया था।
ये रत्न विलियम क्लैक्सटन पेप्पे के निजी संग्रह का हिस्सा थे, जिन्होंने खुदाई का काम करवाया था। उनके पोते और उत्तराधिकारी क्रिस पेप्पे ने इन्हें सोथबीज हांगकांग के माध्यम से नीलामी के लिए रखा था।
गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह के पिरोजशा गोदरेज ने इन 349 रत्नों के संग्रह को खरीदने के लिए आगे कदम बढ़ाया था।