केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने गुजरात विश्वविद्यालय में जैन पांडुलिपि विज्ञान केन्द्र की स्थापना को स्वीकृति दी है।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत इस पहल का उद्देश्य जैन धर्म की समृद्ध साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है।
इससे अमूल्य जैन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए एक समर्पित, अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध हो पाएगी।
उपर्युक्त के अतिरिक्त पीएमजेवीके के तहत निम्नलिखित परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है-
मुम्बई विश्वविद्यालय में अल्पसंख्यक विरासत भाषा और सांस्कृतिक अध्ययन में उत्कृष्टता केन्द्र।
पारसी और बौद्ध समुदायों से सम्बद्ध इस केन्द्र का उद्देश्य अवेस्ता-पहलवी, पाली और प्राकृत में अनुसंधान को बढ़ावा देना व विरासत भाषाओं और परंपराओं को संरक्षित करना है।
बौद्ध अध्ययन में उन्नत अध्ययन : केंद्र दिल्ली विश्वविद्यालय
गुरुमुखी लिपि केन्द्र : खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
जैन अध्ययन केन्द्र : देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर