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Published: Jan 20 | Updated: Jan 20

राजस्थान के नागौर जिला मुख्यालय पर ऐतिहासिक श्री रामदेव पशु मेला 2026′ (नागौर पशु मेला) का शुभारम्भ 19 जनवरी, 2026 को किया गया। यह मेला अपनी प्रसिद्ध नागौरी नस्ल के बैलों के लिए विश्व भर में जाना जाता है।

मेले का परिचय और स्थान

  • मेले के मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का आयोजन 23 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक नागौर के पशु मेला मैदान में किया जाएगा।
  • स्थान: यह मेला नागौर शहर के बाहर मानासर में आयोजित किया जाता है।
  • आयोजक: पशुपालन विभाग, राजस्थान सरकार (सहयोग: पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन)।
  • महत्व: यह भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है और राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यहाँ मुख्य रूप से नागौरी नस्ल के बैलों का व्यापार होता है।

सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

  • नागौरी बैल: यह नस्ल अपनी मजबूती और तेज दौड़ने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। इनका उपयोग मुख्य रूप से खेती और भार ढोने में होता है।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: मेले में रस्साकशी, मूंछ प्रतियोगिता, साफा बांधने की प्रतियोगिता और लोक नृत्य का आयोजन किया जाता है जो पर्यटकों (देशी-विदेशी) को आकर्षित करते हैं।
  • मिर्ची बाजार: यह मेला एशिया के सबसे बड़े लाल मिर्च बाजारों (Red Chili Market) के लिए भी प्रसिद्ध है।

विशेष

  • नागौरी नस्ल: यह गाय की एक भारवाहक नस्ल (Draught breed) है। इसका उत्पत्ति स्थल नागौर का सुहालक क्षेत्र माना जाता है।
  • लोक देवता: यह मेला प्रसिद्ध लोक देवता बाबा रामदेव जी की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
  • तिथि (हिन्दू कैलेंडर): पारंपरिक रूप से यह मेला माघ शुक्ल प्रतिपदा से माघ पूर्णिमा तक भरता है (हालांकि प्रशासनिक तारीखें ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती हैं)।

महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

  • प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहा ‘श्री रामदेव पशु मेला’ राजस्थान के किस जिले में आयोजित होता है?
उत्तर: नागौर।
  • प्रश्न: श्री रामदेव पशु मेला मुख्य रूप से किस पशु नस्ल के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: नागौरी बैल (Nagauri Bulls)
  • प्रश्न: राजस्थान का कौन सा विभाग इस मेले का मुख्य आयोजक है?

उत्तर: पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department)

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