राजस्थान की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) अब एक नए नाम और स्वरूप में लागू हो रही है। 22 जनवरी 2025 को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल’ (PKC-ERCP) लिंक परियोजना का नाम बदलकर ‘राम जल सेतु लिंक परियोजना’ (Ram Jal Setu Link Project) कर दिया था। साथ ही, चंबल नदी पर बनने वाले देश के अनोखे ‘एक्वाडक्ट’ का निर्माण कार्य भी तेजी से शुरू हो गया है।
परियोजना का नामकरण और समझौता
- नया नाम: राम जल सेतु लिंक परियोजना।
- पुराना नाम: पार्वती-कालीसिंध-चंबल-पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP)
- समझौता (MoU/MoA): केंद्र सरकार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच जनवरी 2024 में MoU और दिसंबर 2024 में निर्णायक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर हुए। यह परियोजना अब ‘राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना’ (National Perspective Plan) के तहत मिशन मोड में है।
- जल निर्भरता (Dependability): यह परियोजना अब 75% निर्भरता (Dependability) पर आधारित है, जो इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने के लिए अनिवार्य था।
परियोजना की विशेषताएं
| विशेषता |
विवरण |
| कुल परियोजना लागत |
₹90,000 करोड़ |
| लाभान्वित राज्य |
राजस्थान और मध्य प्रदेश |
| राजस्थान के लाभान्वित जिले |
17 जिले |
| मध्य प्रदेश के लाभान्वित जिले |
13 जिले |
| कुल लाभान्वित जनसंख्या |
3.25 करोड़ लोग |
| सिंचाई क्षेत्र |
4.03 लाख हेक्टेयर |
चंबल एक्वाडक्ट (इंजीनियरिंग का चमत्कार)
- स्थान: यह एक्वाडक्ट (नहर का पुल) कोटा जिले के पीपलदा समेल (दीगोद तहसील) और बूंदी जिले के गोहाटा (इंद्रगढ़ तहसील) को जोड़ेगा।
- विशेषता: यह देश का अपनी तरह का पहला ऐसा ढांचा होगा जहां ‘नीचे नदी बहेगी, उसके ऊपर नहर होगी और सबसे ऊपर गाड़ियां चलेंगी’। इसमें नहर के ऊपर 9 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी।
- आयाम (Dimensions): लंबाई लगभग 28 किलोमीटर (2280 मीटर), आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर। इसकी क्षमता 8,800 क्यूसेक पानी ले जाने की है।
- लागत और लक्ष्य: इसकी लागत लगभग ₹2,330 करोड़ है और इसे जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
लाभान्वित क्षेत्र और जल वितरण
- उद्देश्य: चंबल बेसिन की अधिशेष (Surplus) नदियों (कालीसिंध, पार्वती, मेज, कुन्नू, कुल) का पानी बनास, गंभीर, बाणगंगा आदि बेसिनों में पहुँचाना।
- लाभान्वित जिले: राजस्थान के 17 जिले है। प्रमुख जिले: झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर, जयपुर, टोंक, अजमेर आदि।
- जल की मात्रा: राजस्थान को इस परियोजना से कुल 4102 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी मिलेगा।
प्रमुख बांध और बैराज
- इस परियोजना के तहत पानी को नवनेरा बैराज (कालीसिंध नदी) से लिफ्ट कर मेज बैराज, गलवा बांध, बीसलपुर बांध और ईसरदा बांध तक पहुँचाया जाएगा।
- डूंगरी बांध: बनास नदी पर प्रस्तावित यह बांध परियोजना का एक अहम हिस्सा है, जिसके डूब क्षेत्र में रणथंभौर टाइगर रिजर्व का कुछ हिस्सा आ रहा है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
- हाल ही में चर्चित ‘राम जल सेतु लिंक परियोजना‘ का पूर्व नाम क्या था?
उत्तर: पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) / संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) लिंक परियोजना।
- राम जल सेतु परियोजना के तहत बन रहा देश का अनूठा ‘एक्वाडक्ट‘ किन दो जिलों को जोड़ेगा?
उत्तर: कोटा और बूंदी (कोटा के पीपलदा समेल से बूंदी के गोहाटा तक)।
- इस परियोजना से राजस्थान को कुल कितना पानी (MCM में) आवंटित किया गया है?
उत्तर: लगभग 4102 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर)।
- चंबल एक्वाडक्ट (Aqueduct) की कुल लंबाई कितनी प्रस्तावित है?
उत्तर: लगभग 2.28 किलोमीटर (2280 मीटर)।
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