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Published: Jan 13 | Updated: Jan 13

राजस्थान पुलिस (विशेषकर जयपुर आयुक्तालय) द्वारा विकसित नज़र ऐप’ (Nazar App) को राष्ट्रीय स्तर पर SKOCH सिल्वर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित 105वें SKOCH शिखर सम्मेलन में पुलिस और सुरक्षा’ (Police & Safety) श्रेणी के तहत दिया गया। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य शहरी सुरक्षा को बढ़ाना और किरायेदारों व घरेलू सहायकों के सत्यापन (Verification) को डिजिटल और सुगम बनाना है।

पुरस्कार और आयोजन

  • अवार्ड का नाम: SKOCH सिल्वर अवार्ड 2025 (SKOCH Silver Award 2025)।
  • श्रेणी: पुलिस और सुरक्षा (Police & Safety) – उप-श्रेणी: गवर्नेंस में नवाचार (Innovation in Governance)।
  • आयोजन: यह सम्मान 10 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में “गवर्नेंस विद भारत” विषय पर आयोजित 105वें SKOCH शिखर सम्मेलन में प्रदान किया गया।
  • नेतृत्व: यह पहल तत्कालीन जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ के निर्देशन में शुरू की गई थी और यह अवार्ड डीआईजी कुंवर राष्ट्रदीप सिंह ने ग्रहण किया।

नज़र ऐप क्या है?

  • उद्देश्य: यह एक नागरिक-केंद्रित (Citizen-Centric) मोबाइल एप्लिकेशन है जिसे किरायेदारों, घरेलू नौकरों, ड्राइवरों और गार्डों के ऑनलाइन सत्यापन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • तकनीक और AI: यह ऐप CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) के राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके संदिग्धों और अपराधियों के डेटाबेस (28 करोड़ रिकॉर्ड) से मिलान किया जाता है।
  • डेटा सुरक्षा: ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग किया गया है और इसमें डेटा किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जाता है।

ऐप की प्रमुख विशेषताएं

  • किरायेदार/नौकर सत्यापन: घर बैठे डिजिटल सत्यापन की सुविधा। इसमें बीट अधिकारी द्वारा भी सत्यापन किया जाता है।
  • प्रॉपर्टी निगरानी (Vacancy Monitoring): यदि मकान मालिक शहर से बाहर हैं, तो वे ऐप पर ‘खाली घर’ की जानकारी दे सकते हैं, जिससे पुलिस वहां गश्त (patrolling) बढ़ा देती है।
  • CCTV इंटीग्रेशन: नागरिक अपने सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन पुलिस के साथ साझा कर सकते हैं ताकि अपराध होने पर फुटेज आसानी से मिल सके।
  • अन्य सुविधाएं: सीनियर सिटिजन हेल्प बटन, आगंतुकों (Visitors) का रिकॉर्ड और बीट कांस्टेबल की जानकारी।

कानूनी प्रावधान और सख्ती

नए आपराधिक कानूनों के तहत इस ऐप का उपयोग कानूनन अनिवार्य बनाने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं:

  • BNSS धारा 163: इसके तहत पुलिस ने सत्यापन को अनिवार्य करने के आदेश जारी किए हैं।
  • BNS धारा 170 और 223B: सत्यापन न कराने वाले मकान मालिकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170 (अपराध रोकने के लिए गिरफ्तारी) और धारा 223B (आदेश की अवहेलना) के तहत FIR दर्ज की गई हैं और गिरफ्तारियां भी हुई हैं।

नवीनतम अपडेट

  • रेजिडेंट-सेंट्रिक मॉडल: मार्च 2025 में ऐप को अपडेट किया गया ताकि केवल मकान मालिक ही नहीं, बल्कि किरायेदार (Tenants) भी खुद को रजिस्टर कर सकें और अपने घरेलू सहायकों का सत्यापन स्वयं कर सकें। इससे पहले केवल मकान मालिकों को ही यह अधिकार था।

अन्य विजेता

इसी समारोह में उत्तर प्रदेश पुलिस को महाकुंभ के लिए बनाए गए ICCC (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) और ‘मेटा सुसाइडल अलर्ट’ के लिए SKOCH गोल्ड अवार्ड मिला है।

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