उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में 1920 अगस्त, 2025 को आयोजित विधानसभा सत्र में ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान विधेयक, 2025’ पारित किया गया है।
राज्य में सैकड़ों अवैध मदरसों पर कार्रवाई के तुरंत बाद लाया गया यह विधेयक मदरसा बोर्ड को समाप्त करता है।
यह विधेयक सिख, जैन, ईसाई, पारसी और बौद्ध समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को भी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे का लाभ प्रदान करता है।
इस विधेयक में ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ (USAME) के गठन का प्रावधान किया गया है।
इस प्राधिकरण में एक नामित अध्यक्ष और 11 सदस्य होंगे।
अधिनियम के लागू होने के बाद सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को नए नियामक प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी जो संस्थानों के काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगा बल्कि वित्तीय मामलों पर नजर रखेगा।
प्राधिकरण की मान्यता तीन सत्रों के लिए वैध होगी, जिसके बाद नवीनीकरण कराना होगा।
अन्य पारित प्रमुख विधेयक
समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 : इसके द्वारा अवैध लिवइन संबंधों के संबंध में दंड को बढ़ाया गया है।
धारा 380(2) में संशोधन के अनुसार, लिवइन संबंध में रहने वाले विवाहित व्यक्ति को सात साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
यूसीसी में एक नई धारा भी जोड़ी गई है। इस धारा 390ए के तहत महापंजीयक को विवाह, तलाक, लिवइन रिलेशनशिप या विरासत से संबंधित किसी भी पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार होगा।
धर्म की स्वतंत्रता और गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध (संशोधन) विधेयक, 2025 : इसके तहत ‘जबरन धर्मांतरण’ के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए तीन साल से लेकर आजीवन कारावास तक की जेल की सजा का प्रावधान करता है।
इससे पहले ‘जबरन धर्मांतरण’ के लिए अधिकतम 10 साल जेल की सजा थी।