Rajkumar
Published: Oct 23 | Updated: Oct 27

भारत ने अपना पहला स्वदेशी रूप से खोजा गया एंटीबायोटिक “नैफिथ्रोमाइसिन” (Nafithromycin) विकसित कर लिया है, जो प्रतिरोधी श्वसन संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी है, विशेष रूप से कैंसर रोगियों और खराब नियंत्रित मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है

  • उपलब्धि: यह एंटीबायोटिक भारत में पूरी तरह से परिकल्पित, विकसित और चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित होने वाला पहला एंटीबायोटिक है।
  • प्रभावशीलता : नैफिथ्रोमाइसिन प्रतिरोधी श्वसन संक्रमणों के खिलाफ विशेष रूप से प्रभावी है।
  • विशेष लाभ: यह एंटीबायोटिक विशेष रूप से कैंसर रोगियों और खराब नियंत्रित मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है।
  • विकास: इस एंटीबायोटिक अणु को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने निजी फार्मा कंपनी वॉकहार्ट (Wockhardt) के सहयोग से विकसित किया है।

जीन थेरेपी में बड़ी सफलता

  • भारत ने हीमोफीलिया उपचार के लिए पहला सफल स्वदेशी नैदानिक ​​परीक्षण कर जीन थेरेपी में एक बड़ी सफलता हासिल की है।
  • उपलब्धि: यह हीमोफीलिया उपचार के लिए पहला सफल स्वदेशी नैदानिक परीक्षण है।
  • परीक्षण विवरण: भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित यह परीक्षण एक गैर-सरकारी क्षेत्र के अस्पताल- “क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर” में किया गया था।
  • जीनोम अनुक्रमण व जीन थेरेपी परीक्षण परिणाम: भारत ने पहले ही 10,000 से ज्यादा मानव जीनोम अनुक्रमित कर लिए हैं और इसे बढ़ाकर दस लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
    • जीन थेरेपी परीक्षण में शून्य रक्तस्राव प्रकरणों के साथ 60-70 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई।
  • मान्यता: ये निष्कर्ष प्रतिष्ठित “न्यू इंग्लैंड जर्नल आॅफ मेडिसिन” में प्रकाशित हुए हैं।
  • घोषणा : भारत के स्वदेशी अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में उपर्युक्त उपलब्धियों की घोषणा केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने kमल्टी-ओमिक्स डेटा इंटीग्रेशन एंड एनालिसिस के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोगl विषय पर तीन दिवसीय चिकित्सा कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर 18 अक्टूबर, 2025 को की।

वैश्विक स्वास्थ्य संकट: रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR)

  • भारत के स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन का विकास ऐसे समय में हुआ है जब रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) विश्व स्तर पर एक शीर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है।
  • AMR  की परिभाषा:  AMR तब होता है जब सूक्ष्मजीव स्वयं में ऐसे तंत्र विकसित कर लेते हैं जो उन्हें रोगाणुरोधी दवाओं (antimicrobials)—जैसे कि एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल, या एंटीफंगल—से बचाते हैं।
    • प्रतिरोधक क्षमता माइक्रोब का गुण है, न कि संक्रमित व्यक्ति का।
  •  चिंता का विषय: AMR से जुड़ी मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं। 2019 में, AMR के कारण वैश्विक स्तर पर सीधे तौर पर 1.27 मिलियन मौतें हुईं और 4.95 मिलियन मौतें AMR से जुड़ी थीं। यह समस्या मुख्य रूप से रोगाणुरोधी दवाओं के दुरुपयोग और अति प्रयोग (misuse and overuse) से बढ़ती है।
  • टीके (Vaccines): AMR से निपटने के लिए टीके (Vaccines) आवश्यक हैं, क्योंकि वे संक्रमण को रोकते हैं और रोगाणुरोधी दवाओं के अति प्रयोग को कम करते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र लक्ष्य: सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च-स्तरीय बैठक में, विश्व के नेताओं ने 2030 तक जीवाणु AMR (bacterial AMR)  से जुड़ी मानव मौतों को 10% तक कम करने का संकल्प लिया है।

समाचार पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1: भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित एंटीबायोटिक का नाम क्या है, जिसे कैंसर और खराब नियंत्रित मधुमेह के रोगियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है?

(A)  एमडी56

(B)  ओरटोमाइसिन

(C)  नैफिथ्रोमाइसिन

(D)  रथेनियम

प्रश्न 2:नैफिथ्रोमाइसिन एंटीबायोटिक को भारत में किन दो संस्थाओं के सहयोग से विकसित किया गया है?

(A) स्वास्थ्य मंत्रालय और सिप्ला

(B) जैव प्रौद्योगिकी विभाग  और वॉकहार्ट

(C) एम्स और सर गंगा राम अस्पताल

(D) इसरो और डीआरडीओ

प्रश्न 3: हीमोफीलिया उपचार के लिए भारत का पहला सफल स्वदेशी नैदानिक परीक्षण (indigenous clinical trial) किस गैर-सरकारी अस्पताल में किया गया और इसमें कितनी सुधार दर दर्ज की गई?

(A)  सर गंगा राम अस्पताल; 97-98%

(B)  अपोलो अस्पताल; शून्य रक्तस्राव प्रकरण

(C)  क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर; 60-70%

(D) एम्स, नई दिल्ली; 10,000 जीनोम

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