कालिंजर दुर्ग बना उत्तर प्रदेश का पहला राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल

1. हाल ही में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने किस ऐतिहासिक किले की पहाड़ी को 'राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल' (National Geo-Heritage Site) घोषित किया है?

[A] कुंभलगढ़ का किला
[B] कालिंजर का किला
[C] ग्वालियर का किला
[D] रणथंभौर का किला

Correct Answer: कालिंजर का किला
Notes: GSI ने उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित कालिंजर किले की पहाड़ी को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित किया है। यह यूपी का पहला ऐसा स्थल है। इसे यह दर्जा यहाँ पाई जाने वाली दुर्लभ भूवैज्ञानिक संरचनाओं के कारण दिया गया है।
2. कालिंजर दुर्ग में पाई जाने वाली 'एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी' (Eparchaean Unconformity) संरचना का संबंध मुख्य रूप से किससे है?

[A] मुगलकालीन वास्तुकला की एक विशेष शैली से
[B] 2.5 अरब वर्ष पुरानी ग्रेनाइट और 1.2 अरब वर्ष पुरानी सैंडस्टोन चट्टानों के बीच के ऐतिहासिक समय अंतराल से
[C] विलुप्त हो चुकी डायनासोर की प्रजातियों के जीवाश्मों से
[D] प्राचीन काल में जल संरक्षण की एक तकनीक से

Correct Answer: 2.5 अरब वर्ष पुरानी ग्रेनाइट और 1.2 अरब वर्ष पुरानी सैंडस्टोन चट्टानों के बीच के ऐतिहासिक समय अंतराल से
Notes: एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी एक अत्यंत दुर्लभ भूवैज्ञानिक घटना है। कालिंजर में 2.5 अरब वर्ष पुरानी बुंदेलखंड ग्रेनाइट के ऊपर 1.2 अरब वर्ष पुरानी कैमूर बलुआ पत्थर की परतें मौजूद हैं, जो पृथ्वी के निर्माण और करोड़ों वर्षों के इतिहास का रिकॉर्ड प्रस्तुत करती हैं।
3. भारतीय इतिहास के संदर्भ में कालिंजर का किला अत्यंत प्रसिद्ध रहा है। 1545 ई. में किस शासक की मृत्यु इस किले की घेराबंदी के दौरान बारूद के विस्फोट से हुई थी?

[A] बाबर
[B] अलाउद्दीन खिलजी
[C] शेरशाह सूरी
[D] हुमायूँ

Correct Answer: शेरशाह सूरी
Notes: वर्ष 1545 में कालिंजर किले पर आक्रमण के दौरान शेरशाह सूरी अपनी ही सेना की एक तोप (उक्का नामक आग्नेयास्त्र) से निकले गोले के बारूद में हुए विस्फोट के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई थी।
4. कालिंजर दुर्ग के प्रसिद्ध 'नीलकंठ महादेव मंदिर' का निर्माण मुख्य रूप से किस राजवंश के समय में हुआ था?

[A] गुहिल वंश
[B] चौहान वंश
[C] चंदेल वंश
[D] परमार वंश

Correct Answer: चंदेल वंश
Notes: कालिंजर किला मध्यकाल में चंदेल राजाओं की शक्ति का प्रमुख केंद्र था। यहाँ स्थित प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल शासक परमादित्य देव द्वारा करवाया गया था। पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय विषपान करने के बाद भगवान शिव इसी स्थान पर आए थे।