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Published: Apr 18 | Updated: Apr 18

Rajasthan Current Affairs: हाल ही में राजस्थान वन विभाग ने रणथंभौर टाइगर रिजर्व में दुर्लभ जंगली बिल्ली एशियाई कैरेकल‘ (Asian Caracal) को विलुप्त होने से बचाने के लिए प्रोजेक्ट कैरेकल‘ (Project Caracal) की शुरुआत की है। भारत में इसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया था, क्योंकि वर्तमान में भारत में केवल लगभग 50 कैरेकल ही बचे हैं।

प्रोजेक्ट का स्थान और बजट (Project Venue and Budget)

  • मुख्य स्थान: ‘प्रोजेक्ट कैरेकल’ मुख्य रूप से रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) से शुरू किया गया है।
  • बजट: इस परियोजना के लिए ₹89.94 लाख का शुरुआती बजट आवंटित किया गया है।

प्रोजेक्ट कैरेकल के मुख्य उद्देश्य (Key Objectives of Project Caracal)

इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में कैरेकल के अस्तित्व को सुरक्षित करना है:

  • कैरेकल की सटीक आबादी का आकलन करना।
  • उनके महत्वपूर्ण आवासों (Critical Habitats) की पहचान करना।
  • शोध (Research) और मॉनिटरिंग को मजबूत करना।
  • स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर इनके संरक्षण (Conservation) को सुनिश्चित करना।

सहयोगी संस्थाएं (Collaborating Organizations)

यह परियोजना राजस्थान वन विभाग द्वारा निम्नलिखित संस्थाओं के सहयोग से चलाई जा रही है:

  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)
  • सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र (SACON)
  • टाइगर वॉच (Tiger Watch) इसकी प्रमुख अनुसंधानकर्ता डॉ. शोमिता मुखर्जी हैं।

कैरेकल (Caracal) के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts about Caracal)

  • नाम की उत्पत्ति: इसका नाम तुर्की शब्द कराकुलक‘ (Karakulak) से लिया गया है, जिसका अर्थ है काले कान
  • विशेषता: यह एक मध्यम आकार की फुर्तीली जंगली बिल्ली है जिसे इसके विशेष काले गुच्छेदार कानों के लिए जाना जाता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: मध्यकालीन भारत (दिल्ली सल्तनत और मुगल काल) में भारतीय शासकों द्वारा इसका उपयोग पक्षियों के शिकार के लिए किया जाता था।
  • आवास (Habitat): राजस्थान में यह रणथंभौर के अलावा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और जैसलमेर के थार क्षेत्र में भी पाई गई है।

संरक्षण की स्थिति (Conservation Status)

  • भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA): इसे अनुसूची I (Schedule I) के तहत उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL): भारत में इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त‘ (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
  • IUCN रेड लिस्ट: वैश्विक स्तर पर इसे कम चिंताजनक‘ (Least Concern) माना जाता है, लेकिन भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में यह गंभीर खतरे में है।
  • CITES: इसकी एशियाई आबादी को परिशिष्ट I (Appendix I) में रखा गया है।

सबसे ज्यादा कहाँ पाई जाती है?

  • कैरेकल मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य पूर्व (Middle East), मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के देशों में पाई जाती है।
  • यह मध्य और दक्षिणी अफ्रीका में सबसे अधिक और स्थिर अवस्था में पाई जाती है, जहाँ यह सहारा रेगिस्तान के दक्षिण में व्यापक रूप से फैली हुई है।
  • इसके अलावा, यह अरब प्रायद्वीप से लेकर उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और पश्चिमी भारत तक के शुष्क (Dry) और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों, सवाना और जंगलों में भी मिलती है।

अभ्यास प्रश्नोत्तरी

1. हाल ही में राजस्थान के किस टाइगर रिजर्व में दुर्लभ बिल्ली प्रजाति के संरक्षण के लिए 'प्रोजेक्ट कैरेकल' लॉन्च किया गया है?

[A] सरिस्का टाइगर रिजर्व
[B] रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व
[C] रणथंभौर टाइगर रिजर्व
[D] मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व

Correct Answer: रणथंभौर टाइगर रिजर्व
Notes: राजस्थान वन विभाग ने रणथंभौर टाइगर रिजर्व में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान एशियाई कैरेकल के संरक्षण के लिए ₹89.94 लाख के बजट के साथ 'प्रोजेक्ट कैरेकल' की शुरुआत की है।
2. भारत में कैरेकल (Caracal) बिल्ली मुख्य रूप से किन राज्यों में पाई जाती है?

[A] राजस्थान और मध्य प्रदेश
[B] राजस्थान और गुजरात
[C] मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र
[D] गुजरात और पंजाब

Correct Answer: राजस्थान और गुजरात
Notes: भारत में कैरेकल की संख्या घटकर मात्र 50 के आसपास रह गई है, और वर्तमान में यह प्रजाति मुख्य रूप से केवल राजस्थान और गुजरात के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में ही पाई जाती है।
3. 'प्रोजेक्ट कैरेकल' के कार्यान्वयन में राजस्थान वन विभाग के साथ कौन-सी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं?

[A] भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), SACON और टाइगर वॉच
[B] WWF और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS)
[C] नीरी (NEERI) और पेटा (PETA)
[D] भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI)

Correct Answer: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), SACON और टाइगर वॉच
Notes: 'प्रोजेक्ट कैरेकल' राजस्थान वन विभाग द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र (SACON) और टाइगर वॉच (Tiger Watch) के संयुक्त सहयोग से लागू किया जा रहा है।
4. कैरेकल (Caracal) को भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत किस अनुसूची में रखा गया है?

[A] अनुसूची IV
[B] अनुसूची I
[C] अनुसूची II
[D] अनुसूची III

Correct Answer: अनुसूची I
Notes: कैरेकल को भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA) के तहत अनुसूची I (Schedule I) में रखा गया है, जो इसे बाघ और तेंदुए के समान ही उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। भारत के राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने भी इसे 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त' (Critically Endangered) माना है।