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Published: Apr 21 | Updated: Apr 21

Current Affairs 2026: हाल ही में भारत और रूस ने रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट‘ (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement – RELOS) को पूरी तरह से लागू कर दिया है। फरवरी 2025 में हस्ताक्षरित इस समझौते के लागू होने के बाद, अब दोनों देश युद्ध और शांतिकाल दोनों में एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और हवाई सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। यह समझौता भारत की बहुगुट निरपेक्ष (Multi-alignment) और स्वतंत्र विदेश नीति का एक बड़ा उदाहरण है।

RELOS क्या है? (What is RELOS Agreement?)

  • पूर्ण रूप (Full Form): इसका पूरा नाम ‘रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट’ है।
  • अवधि (Duration): यह समझौता 5 साल के लिए प्रभावी है और आपसी सहमति से इसे अगले 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
  • मुख्य उद्देश्य: इसका लक्ष्य संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय सहायता, आपदा राहत (HADR) संचालन और लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को लॉजिस्टिक सपोर्ट (रसद सहायता) प्रदान करना है।

समझौते के प्रमुख प्रावधान (Key Provisions of the Agreement)

  • सैन्य तैनाती की सीमा (Deployment Limits): इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के यहाँ एक समय में अधिकतम 3,000 सैन्य कर्मी, 5 युद्धपोत और 10 सैन्य विमान तैनात कर सकते हैं।
  • लॉजिस्टिक सुविधाएं: इसके अंतर्गत सेनाओं को ईंधन भरने, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत, आपूर्ति की पुनःपूर्ति और रखरखाव जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्राप्त होंगी।
  • भुगतान प्रणाली (Payment Method): इस समझौते के तहत खर्चों का भुगतान नकद के अलावा वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान (बार्टर सिस्टम) के जरिए भी किया जा सकता है।

भारत और रूस को रणनीतिक लाभ (Strategic Benefits for India & Russia)

  • भारत को लाभ (Benefits for India): भारत को रूस के आर्कटिक क्षेत्र (मुरमांस्क और सेवेरोमोर्स्क बंदरगाह) और प्रशांत महासागर के सुदूर पूर्व (व्लादिवोस्तोक) तक रणनीतिक पहुँच मिलेगी। आर्कटिक में पहुँच भविष्य में ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • रूस को लाभ (Benefits for Russia): रूसी नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय बंदरगाहों पर एक भरोसेमंद और किफायती ठिकाना मिलेगा, जिससे उसे महंगे विदेशी नौसैनिक अड्डे नहीं बनाने पड़ेंगे।

LEMOA और RELOS की तुलना (Comparison with LEMOA)

  • LEMOA: भारत ने वर्ष 2016 में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के साथ ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (LEMOA) पर हस्ताक्षर किए थे।
  • समानता: RELOS भी अमेरिका के साथ हुए LEMOA समझौते के समान ही है, जो सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों के उपयोग की सुविधा देता है। हालाँकि, RELOS को भारत और रूस के विशेष सैन्य संबंधों के अनुरूप अनुकूलित किया गया है।

अभ्यास प्रश्नोत्तरी

1. हाल ही में चर्चा में रहे RELOS समझौते का पूर्ण रूप क्या है?

[A] Regional Exchange of Logistics Agreement
[B] Reciprocal Exchange of Logistics Agreement
[C] Russian-Indian Exchange of Logistics Agreement
[D] Reciprocal Export of Logistics Agreement

Correct Answer: Reciprocal Exchange of Logistics Agreement
Notes: RELOS भारत और रूस के बीच एक रसद (लॉजिस्टिक्स) विनिमय समझौता है जो दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और हवाई सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
2. भारत-रूस RELOS समझौते के तहत एक देश दूसरे देश के क्षेत्र में एक समय में अधिकतम कितने सैनिकों को तैनात कर सकता है?

[A] 1,000 सैनिक
[B] 2,000 सैनिक
[C] 3,000 सैनिक
[D] 5,000 सैनिक

Correct Answer: 3,000 सैनिक
Notes: इस समझौते के तहत दोनों देश एक समय में एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर 3,000 सैनिक, 10 सैन्य विमान और 5 युद्धपोत तैनात कर सकते हैं।
3. LEMOA (लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) समझौता भारत ने किस देश के साथ किया है?

[A] रूस
[B] जापान
[C] फ्रांस
[D] संयुक्त राज्य अमेरिका

Correct Answer: संयुक्त राज्य अमेरिका
Notes: LEMOA पर भारत ने वर्ष 2016 में अमेरिका के साथ हस्ताक्षर किए थे। यह भारत और अमेरिकी सेनाओं को एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं तक पहुँच (जैसे ईंधन, मरम्मत) को आसान बनाता है। RELOS रूस के साथ भारत का ऐसा ही एक समझौता है।
4. RELOS समझौते के माध्यम से भारत को मुख्य रूप से किस नए भौगोलिक क्षेत्र में रणनीतिक पहुँच प्राप्त होगी?

[A] दक्षिण चीन सागर
[B] भूमध्य सागर
[C] आर्कटिक क्षेत्र
[D] कैरेबियन सागर

Correct Answer: आर्कटिक क्षेत्र
Notes: इस समझौते से भारत की समुद्री पहुँच का विस्तार होगा, जिसमें रूस के आर्कटिक क्षेत्र (मुरमांस्क और सेवेरोमोर्स्क बंदरगाह) और व्लादिवोस्तोक तक भारत की रणनीतिक पहुँच सुनिश्चित होगी।